भेषज-अभिज्ञान

भेषज अभिज्ञान (फार्माकोग्नॉसी) शब्द दो ग्रीक शब्दों से आया है: "फ़ार्माकोन" जिसका अर्थ है ‘भेषज’,और "गानोसी" का अर्थ है ‘ज्ञान’। अमेरिकन सोसायटी ऑफ फार्माकोग्नॉसी ने फार्माकोनोगोसी को "प्राकृतिक स्रोतों से दवाओं, दवा पदार्थों या संभावित दवाओं या प्राकृतिक मूल के मादक पदार्थों या औषधीय पदार्थों के भौतिक गुणों के अध्ययन के साथ-साथ प्राकृतिक स्रोतों से नई दवाओं की खोज" के रूप में परिभाषित किया है। भेषज-अभिज्ञानके अंतर्गत औषधीय पौधों के अध्ययन में वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान और औषध विज्ञान विषय शामिल होते हैं। वनस्पति विज्ञान के अंतर्गत कच्ची दावाओ जैसे की औषधीय पौधो तथा उनके उत्पाद, जीव जन्तु तथा उनके उत्पाद, आदि कावर्गीकरण,स्थूल और सूक्ष्म कोशिकीय विश्लेषण पहचान शामिल है। ।

80प्रतिशत होम्योपैथिक दवाये वानस्पतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाने वाले कच्चे माल से बनाई जाती है, जिनमें से लगभग 60%विदेशो द्वारा मंगाए जाते है अत: इनको उपयोग करने से पहले इनकी उचित पहचान और शुद्धता की गुणवत्ता कर लेना जरूरी होता है । होम्योपैथिक भेषज संहिता प्रयोगशालाकाभेषज-अभिज्ञानविभाग होम्योपैथिक प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों के वनस्पतिकवर्गीकरण,स्थूल और सूक्ष्म कोशिकीय विश्लेषण पहचान संबंधी कार्य तथा शोध कार्य में लगे हुए हैं।

भेषज-अभिज्ञानविभाग स्थूल और सूक्ष्म कोशिकीय विश्लेषण पहचान संबंधी कार्यमे उपयोग होने वाले आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों जैसे की मिक्रोटोम,सूक्ष्मदर्शिका,डिजिटलसूक्ष्मदर्शिका आदि से सुसज्जित है। औषधीय पौधों के सूक्ष्म अध्ययन के लिएप्राय: अस्थायी और स्थायी स्लाइड तैयार की जाती है। भेषज-अभिज्ञानविभागमे औषधीय पौधों की सूक्ष्म तस्वीरों का एक डिजिटल संग्राहलय भी हैजो की औषधीय पौधों की पहचान सुनिश्चित करने हेतु उपयोग किया जाता है।

भेषज-अभिज्ञानविभाग मुख्यत: औषधीय विज्ञान की आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके होम्योपैथी में प्रयुक्त होने वाले औषधीय पौधों के मानकीकरण के कार्य मे निरंतर रूप से सक्रिय है। विभाग औषधीय पौधों हेतु फार्माकोपियाल कार्य का नेतृत्व करता है तथा होम्योपैथिक फार्माकोपिया के लिए मसौदा तैयार करता है। अब तक, होम्योपैथिक फार्माकोपिया के 10 संस्करणों को प्रकाशित किया जा चुका है, जिनमे होम्योपैथी में इस्तेमाल की जाने वाली 900 से अधिक वनस्पति दवाओं का मानकीकरण शामिल है। विभाग द्वारा नियमित रूप से देशभर केविभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों का वानस्पतिक सर्वेक्षण भी किया जाता है। अब तकविभाग द्वारामध्य हिमालय क्षेत्र, मध्य भारत और दक्षिण भारत क्षेत्रके कुछ इलाको का वानस्पतिक सर्वेक्षणकिया गया है। सर्वेक्षणके दौरान होम्योपैथिक प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों को बड़े पैमाने पर एकत्रकिया जाता है।

सेवाएं:

औषधीय पौधो के मानकीकरण के अलावा, विभाग होम्योपैथिक दवाओं के मानकीकरण में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकीयों की जानकारी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम मे आए हुये प्रतिभागियो को प्रदान करता है। विभागमे होम्योपैथिक दवाओंमे प्रयोग होने वाले औषधीय पौधो का एक संग्राहलय तथा हरबेरियम भी उपलब्ध है, जिनका प्रयोगऔषधीय पौधो की पहचान हेतु किया जाता है।

तकनीकी टीम:

  • श्री के एन शर्मा, अनुसंधान अधिकारी (संयंत्र परिचय), अनुभाग के प्रमुख
  • डॉ ललित तिवारी, वैज्ञानिक सहायक (फार्माकोग्नॉसी)
  • श्री कंवर सेन, प्रयोगशाला परिचारक
  • श्रीमती रेणु यादव, गार्डनर

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