सूक्ष्मजीवविज्ञान

सूक्ष्मजीवविज्ञान अनुभाग होम्योपैथिक दवाओं के माइक्रोबियल गुणवत्ता विश्लेषण संबंधी कार्यों को संपादित करता है। होम्योपैथिक दवाएं प्राय: पौधो, सूक्ष्मजीव, पशु उत्पाद, मानव उत्पाद जैसे की ऊतक, स्राव, हार्मोन और कोशिका रेखाएं, आदि, खनिज और रसायन से तैयार की जाती है इसलिए होम्योपैथिक दवाओ या उसकी पोटेन्सी में असंसाधित पदार्थ शामिल होने की संभावना होती है। होम्योपैथिक दवाओं में उपयोग की जाने वाली कच्ची सामग्री सूक्ष्मजीवों (बायोबर्डन), टॉक्सिंस, कीड़े, कीटनाशक, एग्रोकेमिकल रेजिडेंस और भारी धातुओं के साथ उच्च स्तर के संदूषण होने की भी संभावना प्रबल हो सकती है। पौधों की कटाई या उनका भंडारण सही तरीको से नहीं करने के कारण, भी होम्योपैथिक दवाओं मे उपयोग किए जाने वाले पौधे रोगजनक सूक्ष्मजीवों से दूषित हो सकते हैं। कच्ची दवाओं में उच्च माइक्रोबियल संदूषण के कारण दवाओं के सक्रिय तत्व खराब हो सकते हैं।

होम्योपैथिक दवाओं के निर्माण में स्रोत सामग्री की गुणवत्ता और प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 के उप-नियम (2), नियम 85ई के अनुसार होम्योपैथिक दवाओं के लिए उचित विनिर्माण निम्नलिखित हैं:

  • दवाओं के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार तथा किसी भी प्रकार के संदूषण से मुक्त होना चाहिए
  • पर्याप्त गुणवत्ता नियंत्रण उपायों को अपनाया जाना चाहिए
  • बिक्री के लिए जारी की गई निर्मित दवा स्वीकार्य गुणवत्ता की होनी चाहिए

ऊपर सूचीबद्ध उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, प्रत्येक लाइसेंसधारी दवाओं के निर्माण की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के लिए कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को विकसित करेगा जिसे एक मैनुअल के रूप में प्रलेखित किया जाना चाहिए और संदर्भ और निरीक्षण के लिए रखा जाना चाहिए।

सूक्ष्मजीवविज्ञान होम्योपैथिक दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों और मानकीकरण को पूरा करने के लिए एक आवश्यक अनुभाग है। सूक्ष्मजीवविज्ञान अनुभाग ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक अधिनियम’ के अनुसार होम्योपैथिक दवाओं के लिए स्टेरिलिटी परीक्षण और माइक्रोबियल सीमा परीक्षण (एमएलटी) का अध्ययन करता है। यह अनुभाग होम्योपैथिक फर्माकोपिया के अनुसार नोसोड़ की गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण भी कर रहा है। सूक्ष्मजीवविज्ञान प्रयोगशाला सभी आवश्यक प्रयोगशाला उपकरणों से सुसज्जित है। प्रयोगशाला को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि संदूषण की संभावना बहुत कम हो। होम्योपैथिक औषधियों के गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों और मानकीकरण के लिए सही स्थिति को बनाए रखने के लिए प्रयोगशाला को अलग-अलग निम्नलिखित क्षेत्र में वर्गीकृत किया गया है:

नमूना प्राप्ति और धारण क्षेत्र

प्रयोगशाला का यह हिस्सा नमूनों को प्राप्त करने और उनके रिकॉर्ड रखने के लिए बनाया है।

मीडिया तैयारी क्षेत्र

यह क्षेत्र विशेष रूप से गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों और होम्योपैथिक दवाओं के मानकीकरण के लिए विभिन्न मीडिया को बनाने और तैयार करने के लिए बनाया गया है। इस क्षेत्र मे निम्नलिखित उपकरण रखे गए है:

  • इलेक्ट्रॉनिक संतुलन
  • शीर्ष पैन संतुलन।

मीडिया तैयारी क्षेत्र मे निम्नलिखित स्टॉक सोल्यूशंस उपलब्ध है:

  • परिचय कल्चर मीडिया
  • जटिल कल्चर मीडिया
  • समृद्ध मीडिया
  • परिभाषित कल्चर मीडिया
  • चुनिंदा मीडिया

स्टेरिलाइजेशन क्षेत्र
यह क्षेत्र विशेष रूप से परिक्षण के दौरान उपयोग किए गए उपकरणों आदि की सफाई और स्टरलाइज़ करने करने के लिए बनाया गया है। यह क्षेत्र निम्नलिखित स्टेरेलाइज उपकरणों से सुसज्जित है:

  • वर्टिकल आटोक्लेव
  • गर्म हवा ओवन

माइक्रोबियल इंक्यूबेसन क्षेत्र
इस क्षेत्र को विशेष रूप से माइक्रोबियल कल्चर प्रयोगों और दवा के नमूनों के इंक्यूबेसन के लिए बनाया किया गया है। यह क्षेत्र निम्नलिखित उपकरणों से सुसज्जित है:

  • बायोसेफ़्टी कैबिनेट
  • लेमिनार वायु प्रवाह

माइक्रोबियल कल्चर इंक्यूबेसन क्षेत्र:
यह क्षेत्र विशेष रूप से माइक्रोबियल विकास के अवलोकन के लिए उपयुक्त स्थिति प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह प्रयोगशाला निम्नलिखित उपकरणों से सुसज्जित है:

  • जैविक ऑक्सीजन मांग इनक्यूबेटर (BOD)
  • रोटरी शेकर
  • फ्रिज
Microbial Section

स्टेरिलिटी परीक्षण

स्टेरिलिटी के लिए परीक्षण असेप्टिक परिस्थितियों में किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों को बनाने के के लिए, परीक्षण के वातावरण को उस तरीके के अनुकूल बनाना होता है जिसमें स्टेरिलिटी का परीक्षण किया जा सके। संदूषण से बचने के लिए बरती जाने वाली सावधानियां किसी भी सूक्ष्मजीव को प्रभावित नहीं करती हैं। जिन कार्य परिस्थितियों में परीक्षण किए जाते हैं उनकी निगरानी नियमित रूप से कार्य क्षेत्र के उचित नमूने द्वारा और उचित नियंत्रण करके की जाती है।

प्रदान की जाने वाली सेवाएं:

होम्योपैथिक दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों और मानकीकरण में माइक्रोबायोलॉजी अनुभाग के योगदान के अलावा, यह अनुभाग प्रशिक्षण मे आए हुये प्रतिभागियो को होमियोपैथिक दवाओं के माइक्रोबायोलॉजिकल विश्लेषण पर प्रशिक्षण भी प्रदान करता है।

तकनीकी टीम:

  • डॉ. एम. रमेश, वैज्ञानिक अधिकारी (माइक्रोबायोलॉजी), विभागाध्यक्ष
  • डॉ. अखिलेश तिवारी, वैज्ञानिक सहायक (माइक्रोबायोलॉजी)